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सोनी गुप्ता

Abstract Inspirational

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सोनी गुप्ता

Abstract Inspirational

नारी का अस्तित्व

नारी का अस्तित्व

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हमेशा जीवन का किया श्रृंगार पीयूष रस छलकाया है, 

उसने अपने अस्तित्व के लिए, कदम आगे बढ़ाया है, 


नई सोच के साथ आज निरख रही दर्पण उसकी छवि , 

लोगों की सोच बदलने के लिए नया चेहरा दिखाया है, 


सच में कोई शक्ति अवश्य ही रहती है इसकी सांसो में, 

आगे बढ़कर धरती से ऊपर आकाश में पंख फैलाया है , 


जिसके घुंघरू की आवाजों से घर-आंगन गूंज जाता था, 

आज उसने अपनी आवाज को, नई पहचान बनाया है, 


खुद के लिए, खुद की जिंदगी पर ऐतराज़ करने के लिए

हर कठिन राहों में नामुमकिन को भी आसान बनाया है, 


समाज की परवाह न करना मायूसी का दामन छोड़कर, 

हर सपनों को पूरा करने के लिए उसने कदम बढ़ाया है, 


आशा यह अब टूटने ना देना उन उम्मीदों की उड़ान को, 

जिसने आगे बढ़कर सफलता का आसमान सजाया है, 


स्वतंत्र उसकी सोच, अब ना कोई बंधन उसे बांध सकेगा, 

अंगारों पर सुलगकर उसने, अपना अस्तित्व बनाया है, 


तुलसी जिसके आंगन में वहाँ अपना प्रकाश दिखाना है, 

अपने लिए जीवन में उसने आशाओं का फूल बनाया है, 


आज नई जिंदगी हंसकर उसे पुकार रही आगे बढ़ने को, 

टकराकर पाषाणों से उसे भी नित सूरज -सा चमकया है, 


निष्ठुर सोच से हटकर अपने अस्तित्व को बनाने के लिए, 

आगे बढ़कर अपने ख्वाबों के सतरंगी रंग से सजाया हैII



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