STORYMIRROR

ना करो कब्ज़ा

ना करो कब्ज़ा

1 min
703


मेरे दिल पर ना करो अपना कब्जा तुम

दिल वो आईना है जरा सी टेस लगने पर टूट जाता है....


मेरे दिमाग में ना बसने की कोशिश करना था

क्योंकि दिमाग मे बसने वालो का कोई नाता नही होता किसी से....


मेरी नजरो में जो बस जाओगे तुम तो पछताओगे

क्योंकि आँखे कब खुशी या गम में बरस पड़ेगी पता नही

आंसू बनकर बह जाओगे तुम...


मेरे चेहरे की हँसी बन जाओ तुम

और नजर आओ उस खुशी में तुम

मेरी रूह में बस जाओ तुम मेरे रोम रोम में समा जाओ तुम


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance