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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Tragedy

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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Tragedy

ना काहू को त्रमाचा

ना काहू को त्रमाचा

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मिथ्या है राष्ट्रवाद की परिभाषा,

व्यर्थ जातिय धर्मी जय की पिपासा,

सत्ता भोग में मंचवासा,

ना काहू को त्रमाचा,

बड़े बड़े भोगविलासी,

मंच पर मिथ्याभाषी,

रुप अनेक दिखाते,

मिथ्या के साधक आते,

मंच पर तंज पर,

कल घोषणा कर जाते।।


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