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Satyawati Maurya

Abstract

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Satyawati Maurya

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न भटकूँ इस जीवन भंवर में

न भटकूँ इस जीवन भंवर में

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भगवन तुम और मैं

मैं समर्पित सदा रह सकूँ,

सादर तुम्हारे चरण कमल में।


निशदिन ध्याऊँ, वन्दन करूँ,

हे ईश ! मेरे सुमिरू तुम्हें मैं।

आशीष में वरदान मिले यह,

न भटकूँ इस जीवन भंवर में।


तुम पर विश्वास से हर दिन जिया है,

एक और एक ग्यारह बने चलो तुम और मैं।


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