STORYMIRROR

Nikhil Katyal

Drama

1  

Nikhil Katyal

Drama

मयखाने के बाहर

मयखाने के बाहर

1 min
351


बैठे हैं मयखाने के बाहर

दिल में कशमकश लिए

बहाना तो कुछ सुझा ऐ साकी

खुशी में, या गम में पिए।


शाम आधी गुजर चुकी है

रात खड़ी दस्तक दिए

सवाल ये जगाएगा देर तक

हम आज जिए, या ना जिए।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama