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Nikhil Katyal

Drama

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Nikhil Katyal

Drama

मयखाने के बाहर

मयखाने के बाहर

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बैठे हैं मयखाने के बाहर

दिल में कशमकश लिए

बहाना तो कुछ सुझा ऐ साकी

खुशी में, या गम में पिए।


शाम आधी गुजर चुकी है

रात खड़ी दस्तक दिए

सवाल ये जगाएगा देर तक

हम आज जिए, या ना जिए।


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