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मैं दुहाई देता रहा

मैं दुहाई देता रहा

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मेरे आँसुओं पे भी उनको,

रहम ना आया,

वो शिकवा करते रहे,

मैं दुहाई देता रहा।


इतने संगीन जुर्म,

ना किए थे मैंने,

वो फेहरिस्त पढ़ते रहे,

मैं कबूल करता रहा।


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