STORYMIRROR

Amit Kumar

Romance

4  

Amit Kumar

Romance

मुस्कुराते रहो

मुस्कुराते रहो

1 min
485

बहुत दिनों से तुम 

याद आ रहे हो

शायद यही सोच कर 

तुम भी इतरा रहे हो


अभी भी कुछ गुंजाइश 

बाकी रह गई है मुझमें 

शायद फ़ना होने की

और इस राज़ को जानकर


तुम मन्द-मन्द मुस्कुरा रहे हो

अनजान भी बनते हो

और जानते भी सब कुछ हो

जाने किस तरह से तुम


अपने और मेरे दिल को बहला रहे हो

अब एक ख़्वाहिश है दिल की

तुम किसी तरह यूँ ही दिल में

बसे रहो खुश रहो मुस्कुराते रहो


और इसी तरह मेरे ख्यालों में

ख़्वाबों में आते जाते रहो।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance