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Vikrant Kumar

Romance

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Vikrant Kumar

Romance

मुक़म्मल जहां हो तुम

मुक़म्मल जहां हो तुम

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जीने की चाह में,

उम्मीद की राह हो तुम।


ख्वाबों के रास्ते में,

स्फूर्ति की पनाह हो तुम।


बेतरबी चल रहे जीवन में,

सुकून की ठंडी छाँव हो तुम।


दुनिया के लिए एक इंसान,

मेरा मुकम्मल जहां हो तुम।



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