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Vijay Kumar parashar "साखी"

Romance

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Romance

मुलाकात

मुलाकात

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किसी को पा लेना ही जिंदगी नहीं होती है

दरिया में रहने से ही प्यास पूरी नहीं होती है,

ये वक्त की नज़ाकत और है साखी की

उनकी हमसे कभी मुलाकात नहीं होती है,

लेकिन यदि वो ख्वाबो में ही वो मिल जाये

ये मुलाक़ात भी वरदान से कम नहीं होती है,

जिसे हम चाहते है वो हमें मिले तो सही

उनकी लिये हरपल ही ये मेरी रूह रोती है,

अंधेरो से भी तब उजाला हो जाता है,साखी

जब भी दिल की दिल से मुलाक़ात होती है।



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