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Mamta Singh Devaa

Inspirational

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Mamta Singh Devaa

Inspirational

मुझे अच्छा लगता है जब...

मुझे अच्छा लगता है जब...

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मुझे अच्छा लगता है जब...


मैं और मेरे हाथ दिल से खाना पकाते हैं 

अतिथि की वाह-वाह से तृप्त हो जाती हूॅं 

पल भर में अपनी सारी थकान

चुटकियों में दूर भगाती हूॅं ,


मुझे अच्छा लगता है जब...


मैं मिट्टी से मिट्टी को लेकर 

कुछ नया सृजन करती हूॅं 

तरह तरह के ऑक्साईड से

नये-नये ग्लेजेज़ का अविष्कार करती हूॅं ,


मुझे अच्छा लगता है जब...


मैं सारे कामों के बीच 

थोड़ा सा सुस्ताती हूॅं

उन्हीं कीमती कुछ क्षणों में

शब्दों से खेल जाती हूॅं ,


मुझे अच्छा लगता है जब...


मैं परिवार के खाने के बाद

अपने लिए बेझिझक कुछ पकाती हूॅं

और अपने बच्चों को उसी खाने का

बेकरारी से इंतज़ार करते हुए पाती हूॅं ,


मुझे अच्छा लगता है जब...


मैं मेरी पीठ पर वार करने वाले को

बिना देखे झट से पहचान जाती हूॅं 

और मैं उनके चेहरे से हमदर्दी का झूठा नक़ाब

एक पल में खिंच उनकी औकात दिखाती हूॅं ,


मुझे अच्छा लगता है जब...


मैं सच बोलने से कभी भी 

किसी भी परिस्थिति में नही घबराती हूॅं

अपनी इस ख़ूबी पर हर बार मैं

ख़ुद पर फ़िदा हो जाती हूॅं ,


मुझे अच्छा लगता है जब...


मैं मुझे प्रताणित करने वालों की

सब भूलकर सेवा करती हूॅं

वो अपने संस्कार दिखाते हैं

मैं अपना संस्कार दिखाती हूॅं ,


मुझे अच्छा लगता है जब...


मैं सही-ग़लत को समझने में

अपना दिल नही दिमाग लगाती हूॅं 

अपना पराया बिना देखे

सही बात सबके सामने रखती हूॅं ,


मुझे अच्छा लगता है जब...


मैं अपनी कमी को पहचान कर 

बिना झिझक सुधारती हूॅं 

गुणवान लोगों के गुण

आदर से स्वीकारती हूॅं ,


मुझे अच्छा लगता है जब...


मैं किसी भी हालात में

झूठा दिखावा नही करती हूॅं

सामने वाले का सिंदूर देखकर

अपना माथा नही फोड़ती हूॅं ।



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