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मिली साहा

Inspirational

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मिली साहा

Inspirational

मत सोच तू कमज़ोर है

मत सोच तू कमज़ोर है

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क्यों उम्मीद लगाता है किसी से तू चल अकेला,

चलता नहीं कोई किसी के साथ यहाँ तू चल अकेला,

ये सफ़र है अपना तेरा अपना, मंजिल तक तुझे है पहुँचना

विश्वास रख खुद पर अभी तो तूफ़ानों से भी है तुझे लड़ना।

फौलाद कर तू इरादे एक जुनून जगा दिल में,

यही तो तुझे हिम्मत देगी सफ़र की हर मुश्किल में,

तुझे खुद ही बनना पड़ेगा सारथी अपने इस सफ़र का,

बनाने होंगे रास्ते खुद तुझे भरोसा ना कर किसी डगर का।

ज़रूरी तो नहीं सदैव अनुकूल हो परिस्थितियाँ,

सफ़र है तो लाज़मी है, आनी इम्तहानों की भी घड़ियाँ,

हो सकता है पड़ेगा तुझे कई बार अंधेरी राह में भी चलना,

तब तुझे अपनी हिम्मत से अपना प्रकाश स्वयं ही है बनना।

मत सोच तू कमज़ोर तुझमें भी हौसला बेजोड़,

बस नाउम्मीदी में भी कभी अपनी हिम्मत ना छोड़,

दुनिया कहेगी तू कर नहीं सकता काम है उसका कहना,

छूट गया कारवां पीछे तो छूटने दे, तू खुद को ना गिरने देना।

कोशिश कर कोशिश कभी बेकार नहीं जाती,

सुना होगा कोशिश करने वालों की हार नहीं होती,

निष्ठा से कर कर्म योग तू, गर अपने लक्ष्य को है पाना,

दिखेगा ज़रूर कर्म के दर्पण में, तेरी सफलता का पैमाना।

निष्ठा प्रयास में तो पर्वतों में भी रास्ता बन जाते,

ज़रूरत नहीं किसी के साथ अकेले मंजिल ढूँढ लेते,

मानव जब ठान लेता है, हवा का रुख भी बदल देता है,

सफलता उसके कदम चूमती जो तूफानों से नहीं डरता है।


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