मॉनसून की पहली मूसलाधार बारिश
मॉनसून की पहली मूसलाधार बारिश
मॉनसून की पहली मूसलाधार बारिश
आसमान से बरसती बारिश की वो बूंदें,
छप्पर से टपकती वो बूँदों की टपटप
उन बूंदों से बुझती धरती की प्यास !
उनसे नहली तृप्त तरु की तरुणाई
उन टकटकी लगाए किसानों के आंखों के
सामने खुशनुमा मंजर !
होठों पर उम्मीद की मुस्कान
सब कुछ कितना मनहर लगता है, ना !
और साथ ही साथ इन बारिश की बूँदों में,
अपने छत पर छपक- छपककर नहाती वो नटखट सहजादी !
और उसे टकटकी लगाए निहारता एक दीवाना प्रेमी कवि।
ये दृश्य सचमुच कितना खुशनुमा होता है।
मानसून की पहली बारिश कितना कुछ मुकम्मल बना देती है,
कितना कुछ मयस्सर करा देती है !
कितने के होठों पर खुशी के मुस्कान ला देती है !
दो प्रेमी जोड़ों को एक-दूसरे से मिला देती है ये बारिश की बूंदें,
यह मानसून की बारिश..!
