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kanksha sharma

Romance

4  

kanksha sharma

Romance

मोहब्बत

मोहब्बत

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जिसकी झलक देखी एक बार,

दिल पुकारे जिसे हर बार,

न आवाज सुनी न बातें की,

फिर भी नज़र आए सूरत उसकी,

दिल रहता हर पल बेचैन,

ढूंढे जिसको मेरे नैन,

मन करे जिससे मिलने को,

जिसके बिन न आए चैन,

जाने कौन है? कहाँ है?

जिसका घर मेरे ख्वाबों का जहान है,

या खुदा, मुझे उससे मिला दे,

मुझे मेरा चैन लौटा दे,

या फिर कर ये सितम,

दिल न ढूंढे कोई सनम,

क्योंकि मोहब्बत है वो शिकंजा,

जिससे है ना कोई बचा,

जिसमें मिलती है बेवफाई की सज़ा,

फिर भी फंसने को दिल है तैयार सदा।


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