मोहब्ब्त क्या चीज है
मोहब्ब्त क्या चीज है
ये मोहब्ब्त भी अजीब है
हंसकर रोती है, रोकर हंसती है।
क्या यही मोहब्ब्त की तहज़ीब है
मस्ज़िद हो या मंदिर जाते है सिर्फ़,
उनको पाने की दुआ करने के लिए,
कैसे भी हो इस दिल को बस
उसका ख़ुदा नसीब हो जाये।
ये मोहब्ब्त दरिया को भी
कर देती गरीब है
ऊपर वाला वो ख़ुदा भी हैरान है,
आख़िर ये मोहब्बत भी क्या चीज है।

