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Lajita Nahak

Romance Tragedy

4.5  

Lajita Nahak

Romance Tragedy

मनाओगे क्या ?

मनाओगे क्या ?

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मैं रूठ गई,चुप रही

सोचा था तुम आओगे,मनाओगे पर तुम आए ही नहीं।

आसूं निकले,दर्द हुआ,दर्द का बयान भी किया,

फिर भी तुमने नजर अंदाज किया।

तुमने कहा था कि अगर तुम रूठ जाओ तो मैं मना लूंगा और मैं रूठ जाऊं तो तुम सम्भल लेना,

यह सब याद तो था न ?

मैं टूट गई,बिखर गई 

पर तुमने मुझे संवारा ही नहीं।

रोती रही रात भर,बुखार से तपती रही मैं,

तुमने बस छोड़ दिया मुझे मेरे हाल में।

मैं भी चुप हूं और तुम भी

क्या आगे बातें होगी कभी ?

अब तो रह लेते हो मेरे बिना 

घण्टों,दिनों,शायद महीना।

महीना बदल के साल बनेंगे और साल दशक,

लेकिन याद रखना प्यार करती हूँ तुम्हे बेशक।


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