Lajita Nahak
Tragedy Classics
खुशी छू कर गुजर जाती है,
और गम बस बेवजह गले ही पड़ जाती है।
हम कितनी भी कोशिश कर ले
खुशी ज्यादा देर तक टिकता नहीं,
और गम अपने जगह से
सिरकने का नाम कभी लेता नहीं।
गम
बस आश है यही
अंधेरा
मेरी आशिकी तु...
खूबसूरत है एक...
कभी बताऊं तुम...
हम जो मिल जाए...
याशिका
अन्तर
फिर एक बार
क रहा हूँ देश जाति की, दूषित हुई सियासत पर । क रहा हूँ देश जाति की, दूषित हुई सियासत पर ।
उस दिन पहली बार डर से सामना हुआ था .. उस दिन पहली बार डर से सामना हुआ था ..
वक्त जो गुजर जाए लौट कर आता नही। वक्त जो गुजर जाए लौट कर आता नही।
मेरा बेटी होना बड़ा अपराध है क्या? मेरा बेटी होना बड़ा अपराध है क्या?
तुम जीजाजी के लिए सिर्फ एक सेक्स स्लेव बन के रह गयी हो। तुम जीजाजी के लिए सिर्फ एक सेक्स स्लेव बन के रह गयी हो।
हाबू आया हाबू आया, सुणलो लोगों कान लगाय। त्राहि त्राहि सब जग होरी, पाया कोनी कोई उपाय। हाबू आया हाबू आया, सुणलो लोगों कान लगाय। त्राहि त्राहि सब जग होरी, पाया कोनी ...
तय किया लोमड़ी नहीं छोड़ेगी चाहे जितने उपर लटके दूसरों के लिए खट्टे नहीं छोड़ेगी तय किया लोमड़ी नहीं छोड़ेगी चाहे जितने उपर लटके दूसरों के लिए खट्टे ...
इतिहास की किताबें भर दें अपने सामने की गोलियों के रोमांच के साथ। इतिहास की किताबें भर दें अपने सामने की गोलियों के रोमांच के साथ।
आज वर्षों बाद तुम्हें पढ़ा है मैंने, एक वक़्त था जब प्यार करती थी तुमसे। आज वर्षों बाद तुम्हें पढ़ा है मैंने, एक वक़्त था जब प्यार करती थी तुमसे।
आज बाबूजी कुछ कह रहे थे माँ से अवाज़ थी, पर जरा दबी हुई। आज बाबूजी कुछ कह रहे थे माँ से अवाज़ थी, पर जरा दबी हुई।
एक बुझता हुआ चिराग, हूँ मैं, अपनी मंजिल की खोज में।" एक बुझता हुआ चिराग, हूँ मैं, अपनी मंजिल की खोज में।"
कितनों ने राह में तोड़ दिया दम टूटी आस राह तकने वालों की, कितनों ने राह में तोड़ दिया दम टूटी आस राह तकने वालों की,
मर मिटते हो जिसके चेहरे पर उसे पाकर ही दम लेते हो। मर मिटते हो जिसके चेहरे पर उसे पाकर ही दम लेते हो।
बम यहाँ कैसे आ सकता है इस चौक पर तो हमेशा पुलिस रहती है। बम यहाँ कैसे आ सकता है इस चौक पर तो हमेशा पुलिस रहती है।
मै सरकारी ऑफिस हूं, अब मै लबालब भर गया हूं। मै सरकारी ऑफिस हूं, अब मै लबालब भर गया हूं।
कुदरती विरोध प्राकृतिक विपदा कुदरती विपदा प्रकृति पहल हारा प्रकृति विकाश और जीवन कुदरती विरोध प्राकृतिक विपदा कुदरती विपदा प्रकृति पहल हारा प्रकृति विकाश...
उसने स्कूटी वहीं खड़ी की और दौड़ कर गेट के अंदर आई तो देखा कि दो लाश सफेद चादर में लिपटे उसने स्कूटी वहीं खड़ी की और दौड़ कर गेट के अंदर आई तो देखा कि दो लाश सफेद चादर में...
एक बार हाथ जोड़कर, हैं वोट मांगने आ जाते कभी पैरों पर गिरकर , हैं अपने भी बन जाते। एक बार हाथ जोड़कर, हैं वोट मांगने आ जाते कभी पैरों पर गिरकर , हैं अपने भी बन ...
गोकुल के ग्वाल कन्हैया, मुरली मनोहर, कान्हा तारणहार रचाए लीला, गोकुल के ग्वाल कन्हैया, मुरली मनोहर, कान्हा तारणहार रचाए लीला,
मेहनतकश आंशिक शिक्षित कम आदर नौकरी उसी स्तर शिक्षित होना एक पीड़ादायक मेहनतकश आंशिक शिक्षित कम आदर नौकरी उसी स्तर शिक्षित होना एक पीड़ादायक