Anjali Srivastav
Tragedy
सच्ची-सच्ची बात बताकर
वो झूठी बातें बोल गए।
भावों के मेरे ऊँचा कद को
वो आसानी से तोल गए।
उन दिनों जिनसे मिलकर
सकारात्मक ऊर्जा मिलती थी।
अब वो दिखाकर तजूर्बें चालाकी के
बूँद - बूँद शहद सा घोल, घोल गए।
हिंदी से हो स...
भारत की बेटी
तेरी मेरी कहा...
नशामुक्ति
कोरोना
फ़साने
माँ का हिसाब
पुजारन बनना च...
अपनों के दिल
बसंत
गिरगिट को भी अब मात सत्ता के लिए वो तोड़ते गिरगिट को भी अब मात सत्ता के लिए वो तोड़ते
तुम्हारे साथ साथ हमसे दूर है! अब तुम बताओ कोई ख़ुद को संभाले कैसे..? तुम्हारे साथ साथ हमसे दूर है! अब तुम बताओ कोई ख़ुद को संभाले कैसे..?
बस अब और नहीं अपनी ख्वाहिशों को रौंदना ख्वाबों को अपने अब मुझे नहीं है तोड़ना बस अब और नहीं अपनी ख्वाहिशों को रौंदना ख्वाबों को अपने अब मुझे नहीं है...
बहुत कुछ खुद से सहने का ,मतलब सिखा दिया। बहुत कुछ खुद से सहने का ,मतलब सिखा दिया।
वही व्यक्ति बन पाया है, अपनी जिंदगी मे हीरक जिसने पहचान ली अपने भीतर की, प्रदीप्त चमक। वही व्यक्ति बन पाया है, अपनी जिंदगी मे हीरक जिसने पहचान ली अपने भीतर की, प्रद...
लम्हे में सिमट सी गई जो हमारी ये ज़िन्दगी, सब कहेंगे ये तो बड़ी ही खूबसूरत कहानी है ! लम्हे में सिमट सी गई जो हमारी ये ज़िन्दगी, सब कहेंगे ये तो बड़ी ही खूबसूरत कहान...
बस हर जगह आप ही महसूस होते है... तब "हे कृष्ण " अब हर पल बस आप ही याद आते हैं। बस हर जगह आप ही महसूस होते है... तब "हे कृष्ण " अब हर पल बस आप ही याद आते है...
जो प्रेम लिखूं तो तेरा नाम ले कर, जो जीवन लिखूं तो हमारा नाम दे कर। जो प्रेम लिखूं तो तेरा नाम ले कर, जो जीवन लिखूं तो हमारा नाम दे कर।
कोहरा.... तेरे मेरे इश्क़ पर छाया है बन सन्नाटा कोहरा.... तेरे मेरे इश्क़ पर छाया है बन सन्नाटा
वो गाँव वो आबो हवा वो ठाठ अब विदेशी हो गये, आसमान छूने की चाह मेँ ज़मीं से दूर होते गये। वो गाँव वो आबो हवा वो ठाठ अब विदेशी हो गये, आसमान छूने की चाह मेँ ज़मीं से दूर...
शर्मो हया का है जैसे निकला है जनाजा, बेहयाई व बेशर्मी इस दौर का है तक़ाज़ा ! शर्मो हया का है जैसे निकला है जनाजा, बेहयाई व बेशर्मी इस दौर का है तक़ाज़ा !
सब होशियारी से अपने करतब दिखा ही जाते हैं जो मौका मिले उसका फायदा उठा ही जाते हैं। सब होशियारी से अपने करतब दिखा ही जाते हैं जो मौका मिले उसका फायदा उठा ही जाते...
घर के बड़े हो गए व्यस्त मोबाइल हाथ में थामे। घर के बड़े हो गए व्यस्त मोबाइल हाथ में थामे।
कब आओगे हमको अपने दर्शन देने कान्हा जाने क्यूँ इतना मुझको तरसाता है। कब आओगे हमको अपने दर्शन देने कान्हा जाने क्यूँ इतना मुझको तरसाता है।
तेरे बीना अब मै अधूरी बनी हूं, सूमशान जीवन मै बिता रही हूं। तेरे बीना अब मै अधूरी बनी हूं, सूमशान जीवन मै बिता रही हूं।
जिसके लिए दिल सदा इबादत करता जिसके लिए दिल सदा इबादत करता
सजा ये ऐसी बढ़ रही उम्र मेरी ढल रही। सजा ये ऐसी बढ़ रही उम्र मेरी ढल रही।
तेरे मिलन के लिये प्यासी बनी हूं, नगर की गलियोंमें तुझे ढुंढ रही हूं। तेरे मिलन के लिये प्यासी बनी हूं, नगर की गलियोंमें तुझे ढुंढ रही हूं।
मैं अकेले जब तक बन ना जाता काबिल अपने पिता- माता की शाबाशी के। मैं अकेले जब तक बन ना जाता काबिल अपने पिता- माता की शाबाशी के।
कुछ उदासी थी छाई लग रहीं थी कुछ मुरझाई। कुछ उदासी थी छाई लग रहीं थी कुछ मुरझाई।