STORYMIRROR

Anjali Srivastav

Inspirational

3  

Anjali Srivastav

Inspirational

अपनों के दिल

अपनों के दिल

1 min
216


अपनों के दिल में अनजाने हो गए

खुशियों का आना जमाने हो गए।।


हर तरफ है नफरतों का बीज अब

इनके ही अब तो ठिकाने हो गए।।


थे कभी हम फूल से इनके लिए 

बन के कांटा बस बेगाने हो गए।।


रह गए मझधार में सब छोड़कर

एक तेरे खातिर दीवाने हो गए।।


लिखें हर दास्तां ग़ज़ल गीतों में हम

फकत अब ये ही बहाने हो गए।।


बन्ध कर रूह से हम जीने लगे

दर्द "अंजली" और सुहाने हो गए।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational