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Shiv kumar Gupta

Inspirational

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Shiv kumar Gupta

Inspirational

मित्रता

मित्रता

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बहुत कठिन है

परिभाषा में बांधना

मित्रता को।


दम तोड़ देती है 

परिभाषा की चौखट 

पर पहुंचते- पहुंचते ।


यह निर्बंध है 

मुक्ति का द्वार है ।


मित्र के दु:ख का हलाहल पीकर 

जो अपने हिस्से के 

सुख का अमृत पान‌ करा दे ।


वही मित्रता के रथ को 

निरंतर आगे बढ़ा सकता है ।


विपत्ति में 

मित्रता की सच्ची परख होती है ।


सुख में तो बहुतेरे 

मित्र आकाशीय 

यात्रा की उड़ान भरते हैं ।


दिखाते हैं सब्ज़बाग

स्वप्निल दुनिया की सैर कराते हैं ।


लेकिन जो दुर्दिन में 

आंसू को भाप बनाकर मेघ 

में मिला दे ।


वही सच्चा मित्र होता है

और ऐसी मित्रता ही

तवारीख़ में स्वर्णाक्षरों में लिख जाती हैं ।


सुदामा और कृष्ण

कर्ण और दुर्योधन।


परिचायक हैं इस बात के 

ज़िंदगी की रूमाल में 

गठियायी जा सकती है 

ऐसी मित्रता की मिसाल ही।


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