मित्र
मित्र
आकर्षण विकर्षण
में बँधा हुआ
परिवर्तन परिवर्धन
करता है मित्र !
साथ हँसता और रोता
बिन कहे मित्र !
गिरते ही संभालने चला
आता है मित्र !
कई रोगों की अचूक दवा
बनता है मित्र !
सूर्य की रोशनी बन हरता
है तम मित्र !
जीवन का सौभाग्य मिले
जो ऐसा मित्र।
