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Praveen Gola

Romance

4.5  

Praveen Gola

Romance

महोत्सव

महोत्सव

1 min
321


नववर्ष आते ही शुरू हो जाते हैं महोत्सव ,

होली , बैसाख और दीपावली का शोर हर तरफ ,

मेरी हर खुशी में तेरा साथ देता है गवाही ,

जब धानी चुनर ओड़ मैं तकती तुझे हर तरफ।


तेरा हाथ थाम कसके मैं बेसुध सी कहीं घूम जाती ,

फिर रंग लगा तेरे गालों पे उड़ा देती गुलाल हर तरफ ,

तेरा भर के बाहों में मुझे वो चूमना अच्छा लगता ,

मैं बहुत देर तक मदहोश रहती और देखती हर तरफ |


दीपावली के शोर में जब सब मिलकर पटाखे चलाते ,

हम अपने दिल की फुलझड़ी को घुमाते हर तरफ ,

मिठाईयाँ मुँह मीठा करातीं सबका त्योहारों पर ,

हम चुम्बन से मुँह मीठा करा भाग जाते हर तरफ। 


मेरे हर महोत्सव में तुम बस इसी तरह शामिल रहो ,

मैं आखिरी साँस तक भी ढूँढूँगी तुम्हे हर तरफ ,

इस बेरंग सी ज़िन्दगी में गर रंग है कोई नया ,

तो वो प्यार का ही रंग है जिसकी पूछ है हर तरफ।।



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