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Praveen Gola

Tragedy

4  

Praveen Gola

Tragedy

फिर दोबारा से

फिर दोबारा से

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फिर दोबारा से ,
सब शुरु करने का ....
ख्याल मार देता है ,
जो खत्म हुआ ,
उस एहसास का ....
इकरार मार देता है |

यूँ तो तड़प अब ,
उठती नहीं .....
तेरे जाने के बाद ,
पर तुझे सामने पा ,
ये उठेगी नहीं ....
ये सवाल मार देता है |

बड़ा मीठा था ,
ईश्क ~ए ~जुनून वो ,
तेरे साथ यारा ,
जो सोच कर ,
आज भी दिल से ,
धड़कन निकाल देता है |

कह दिया हँस कर ,
सब मिटाने को ,
जो करे बवाल ,
तब भी रह गया ,
शब्द ~ए ~एहसास ,
जो अर्थ निकाल देता है |

लिखना तभी ,
खत्म होगा अब ...
जब साँसे थमेगी सब ,
हर मुलाकात में ,
बिना इजाजत ,
ये दर्द संभाल देता है |

कोई चाहे अगर ,
खुद पर लिखवाना ....
गाना पड़ेगा वही तराना ,
एक एहसास ,
बराबर होकर  ....
ईश्क निखार देता है |

फिर दोबारा से ,
सब शुरु करने का ....
ख्याल मार देता है ,
जो खत्म हुआ ,
उस एहसास का ....
इकरार मार देता है ||

 




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