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Praveen Gola

Romance

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Praveen Gola

Romance

आँखों में बसा लूँगा

आँखों में बसा लूँगा

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मुट्ठी मे नहा दूंगा तेरे सारे बदन को,

मिल के सजा दूँगा तेरे सारे बदन को ,

प्यार अपना ऐसे ही तू परवान चढ़ने दे ,

आँखों में बसा लूँगा तेरे सारे बदन को ।


दिल की उमंगें कभी कम होती नहीं ,

प्यास वाली तरंगें लबों को भिगोती नहीं ,

जीने की चाह में तू और रंग सजा जा ,

दिल में बसा लूँगा तेरे सारे बदन को ।


रात दिन बेचैन करती तेरी गर्म साँसें मुझे ,

नाग सी जकड़ देती मेरी गर्म बाहें तुझे ,

सीने में दबी धड़कन तू एक बार सुना जा ,

उंगलियों से नाप दूँगा तेरे सारे बदन को ।


बहुत प्यास दिखती है तेरे अंदर मुझे रोज ,

बहुत आग दिखती है अपने अंदर मुझे सोच ,

इस प्यास और आग का मिलन तू करा जा ,

अपने लबों से चूम लूँगा तेरे सारे बदन को ।


मुट्ठी मे नहा दूंगा तेरे सारे बदन को,

मिल के सजा दूँगा तेरे सारे बदन को ,

प्यार अपना ऐसे ही तू परवान चढ़ने दे ,

आँखों में बसा लूँगा तेरे सारे बदन को ।|


 


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