आँखों में बसा लूँगा
आँखों में बसा लूँगा
मुट्ठी मे नहा दूंगा तेरे सारे बदन को,
मिल के सजा दूँगा तेरे सारे बदन को ,
प्यार अपना ऐसे ही तू परवान चढ़ने दे ,
आँखों में बसा लूँगा तेरे सारे बदन को ।
दिल की उमंगें कभी कम होती नहीं ,
प्यास वाली तरंगें लबों को भिगोती नहीं ,
जीने की चाह में तू और रंग सजा जा ,
दिल में बसा लूँगा तेरे सारे बदन को ।
रात दिन बेचैन करती तेरी गर्म साँसें मुझे ,
नाग सी जकड़ देती मेरी गर्म बाहें तुझे ,
सीने में दबी धड़कन तू एक बार सुना जा ,
उंगलियों से नाप दूँगा तेरे सारे बदन को ।
बहुत प्यास दिखती है तेरे अंदर मुझे रोज ,
बहुत आग दिखती है अपने अंदर मुझे सोच ,
इस प्यास और आग का मिलन तू करा जा ,
अपने लबों से चूम लूँगा तेरे सारे बदन को ।
मुट्ठी मे नहा दूंगा तेरे सारे बदन को,
मिल के सजा दूँगा तेरे सारे बदन को ,
प्यार अपना ऐसे ही तू परवान चढ़ने दे ,
आँखों में बसा लूँगा तेरे सारे बदन को ।|

