STORYMIRROR

KHEM SINGH

Abstract

4  

KHEM SINGH

Abstract

महंगाई कम कर दो

महंगाई कम कर दो

1 min
484

कर सकते हो तो करके दे दो

वापस लाकर उस सच्चाई को

भ्रष्ट आतंक को खत्म कर दो

महंगाई को जरा कम कर दो


महंगाई पर महंगाई होती होगी

भूख पर भूखे मरेंगे लोग

कब तक आबरू लुटती रहेगी

कब तक भागेंगे यूं भोग


दिन दहाड़े लूटे खजाना

बंद करो इस कडों को

महंगा हो गया गैस चलाना

अब कैसे पकाएं अंडों को

 

कब तक सहेंगे मार इसकी

कब घटेगी इसकी डोर

कब आएगा सस्ते का मौसम

नाचेंगे आंगन में मोर


ऐसी विधि बना दे दाता

छुए ना कोई बुराई को

भ्रष्ट आतंक को खत्म कर दो

महंगाई को जरा कम कर दो।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract