वसंत का आनंद
वसंत का आनंद
1 min
217
मीठी मीठी हवा
प्यारी प्यारी सुगन्ध
सुहावना है मौसम
ना है कोई दुर्गंध
है ये जन्नत सी
ऋतुओं में जनक
मिलती है इसमें
प्यारी सी सनक
है ये ऋतु ऐसी
कोमार्य से भरी हुई
आओ सब खेल खेलें
आज यह घड़ी भई
अलौकिक आनन्द घटा
छायी रहती है
मंद मंद मुस्काती कलियां
गाती रहती है
महक उड़ी है चहकी चिड़िया
सजी सिंगार से क्यारी
रस पीने आ रही है
तितली रानी प्यारी
लगता इस चमन बाग में
चाँदी है उग कर आई
अलौकिक आनन्द घटा
वसंत ऋतु है लाई।
