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KHEM SINGH

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KHEM SINGH

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वसंत का आनंद

वसंत का आनंद

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मीठी मीठी हवा

प्यारी प्यारी सुगन्ध

सुहावना है मौसम

ना है कोई दुर्गंध

है ये जन्नत सी

ऋतुओं में जनक

मिलती है इसमें

प्यारी सी सनक

है ये ऋतु ऐसी

कोमार्य से भरी हुई

आओ सब खेल खेलें

आज यह घड़ी भई

अलौकिक आनन्द घटा

छायी रहती है

मंद मंद मुस्काती कलियां

गाती रहती है

महक उड़ी है चहकी चिड़िया

सजी सिंगार से क्यारी

रस पीने आ रही है

तितली रानी प्यारी

लगता इस चमन बाग में

चाँदी है उग कर आई

अलौकिक आनन्द घटा

वसंत ऋतु है लाई।



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