वसंत
वसंत
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हर कली महकने लगती है जब
भंवरे भी गुनगुनाते लगते हैं तब
सज संवर कर आए है कामदेव
झरने कल कल गीत गाते हैं जब
धरा हो जाती है नीली - नीली सी
सरसों के पोधों से पीली - पीली सी
ठंड की मार से काले पड़ जाते हैं
इस धरा के सब प्रकृति के पौधे
तभी आता है ऋतुराज दंड देने
उगते है पेड़ दबते ठंड के बोधे
यह तो निश्चित ही अनोखा मौसम है
वसंत ही है ऋतुओं का राजा
इस समय सब मौज मस्ती करते
आजा हमसे भी हाथ मिला जा।
