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Neeraj pal

Inspirational

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Neeraj pal

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महफ़िल

महफ़िल

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आ पड़ा हूँ तेरी "महफ़िल" में, चरणों में तेरे शीश झुकाने।

मात-पिता,सुत,भाई, बंधु हो, तुम ही रग-रग में हो समाने।।


सतकर्मों का साथ न छूटे, शतपथ के हम राही बन लें।

पर-सेवा का व्रत धारण कर, तुम्हरे वाणी के गीत बन लें।।


सुमिरन तुम्हरा छूट न पावे, मन ही मन तुम्हरे यश गावें।

 तन-मन-धन सब तुमको अर्पण, तुमको ही निशदिन ध्यावें।।


आया हूँ प्रभु तुम को अपनाने, रख लेना अब लाज हमारी।

हार चुका अब अपने जीवन से, परीक्षा मत लो अब हमारी।।


दरबार तुम्हारा अमृत्व है देता, दीन हो जो तुम्हरे दर आता।

"नीरज" को अब ठौर न कोई, तुम बिन अब कुछ न सहाता।।


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