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piya presents

Romance Fantasy

4.1  

piya presents

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मेरी कल्पना में

मेरी कल्पना में

1 min
46


कल्पना अजब अथाह अनंत जो मेरी,

पल-पल तू ही तो उसमें समाया रहता है,


स्वप्न सितारों से समाए जो मेरी इन रातो में, 

क्षण-क्षण बस तू ही तो उसमे छाया रहता है


झट झपकती मेरी इन पलकों में,

झप-झप आता जाता तेरा ही तो साया रहता है,


हाँ, तेरी ही यादों का प्रतिबिंब तो,

मेरे संग-संग चल जैसे मेरी ही छाया बन रहता है।


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