STORYMIRROR

AKSHAT YAGNIC

Fantasy

3  

AKSHAT YAGNIC

Fantasy

मेरा सुनहरा स्वप्न

मेरा सुनहरा स्वप्न

1 min
294

आया मुझको स्वप्न सुनहरा

किया उसने मेरे मन में बसेरा

देखा मैंने स्वयं को आकाश में उड़ते हुए

रंग थे मेरे आस पास अद्भुत छटा बिखेरते हुए

मैंने खुद को देखा घुलते हुए सूर्य की किरणों में

जा बैठा मैं सूर्य के ही पावन चरणों में


सूर्य के पास हो के भी मुझे हुआ शीतलता का अनुभव

बड़े अद्भुत संगम से मुझे मिला ऐसा वैभव

आगे बढ़ा तो जा मिला मैं उड़ते पंछियों से

देखा मैंने धरती को, आकाश की अनंत गहराइयों से

मैंने सोचा की गर ये स्वप्न न होता

तो क्या मैं सदैव ही इतना प्रफुल्लित रहता


क्या जीवन में प्रसन्न रहना केवल है स्वप्न का विषय

मेरे इस स्वप्न ने मिटा दिये मेरे सारे संशय

मैं ही जनक हूँ अपनी प्रसन्नता का

यही है मार्ग मेरी उन्नति का

प्रकृति तो सदैव ही है मेरे साथ

तो क्यूँ न मैं थाम लूँ उसका ही हाथ


मैंने किया अपने स्वप्न से प्रेरित हो एक अटल निर्णय

प्रकाश फैलाऊंगा मैं चारों ओर, जैसे हो सूर्य की किरणें।

 

 


এই বিষয়বস্তু রেট
প্রবেশ করুন

Similar hindi poem from Fantasy