STORYMIRROR

Abhishek Singh

Tragedy

2  

Abhishek Singh

Tragedy

मेरा फ़ैसला

मेरा फ़ैसला

1 min
254

एक फ़ैसला लेना पड़ा,

ना चाहते हुए भी छोड़ जाना पड़ा।


जब, मेरे फ़ैसले पे उनको रोना पड़ा।

मेरे फ़ैसले पे मुझे गुनहगार होना पड़ा।


मुझे कई बार ये करना पड़ा।

मुझे कई बार नि:शब्द होना पड़ा।


अब फ़ैसला सफल दिखा,

जब फ़ैसले का असर दिखा।


मुझमें उनको उनके पापा की छवि दिखा।

मुझे कई बार ये करना पड़ा।


कई बार उनका दिल तोड़ना पड़ा।

एक फ़ैसला लेना पड़ा।

एक फ़ैसला लेना पड़ा।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy