STORYMIRROR

Abhishek Singh

Romance Classics Fantasy

4  

Abhishek Singh

Romance Classics Fantasy

उसकी चुनरी..!

उसकी चुनरी..!

1 min
258

उसकी चुनरी मेरे

हर इरादे जानती है

वो बेख़ौफ़ मैं बेशर्म

मेरी हर बात जानती है


चाहती तो बेनकाब 

कर सकती थी मुझे

शायद उसको इश्क़ था मुझसे

इसलिए दिल-ए ज़ुबान 

कुछ नहीं बताती है


उसकी चुनरी मेरे 

हर इरादे जानती है

वो बेख़ौफ़ मैं बेशर्म

मेरी हर बात जानती है


हो अंधेरी या चाँदनी रात

दरमियाँ रखती हर एक बात

इश्क़-मोहब्बत,नफ़रत-उल्फत

या हो दो ज़िस्मों की मुज़्मर बात


उसकी चुनरी मेरे 

हर इरादे जानती है

वो बेख़ौफ़ मैं बेशर्म

मेरी हर बात जानती है

मुज़्मर-छुपी हुई बात।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance