मेरा क्या कसूर
मेरा क्या कसूर
आज फिर तेरी महफ़िल में मेरा नाम आया
लगता है ये मेरी सजा का कोई पैगाम लाया
अरे सुन लेते मेरी फ़रियाद जरा
तू तो बिन सबूत - बिन गवाह के
मेरी सजाय - मौत का फ़रमान लाया
करनी थी जब ना मुझे
क्यों मोहब्बत का जाम पिलाया
बिन कसूर में भी मुझे गुनहगार बनाया
लो हम आज अपने सिर से सब बोझ उतार डाले
कल वो सारे फैसले ले डाले जो
अतीत में मेरा जीवन नर्क बना डाले
इस दिल से ना जाने क्या - क्या बहार निकाले
ले कर चले हम अपने ख़्वाबों के शहर को तुम्हारे हवाले
अब इस जश्न में ना रहना
कि मेरा क्या कसूर वो तो
अपने आप ये सारे गुनाह कर डाले
जबसे तुम मुझसे जुड़ने लगे शायद
भगवान ने मेरे नसीब के खोल दिए सब ताले
अरे मैं वो बंदा जो दिल की सुने और
दिमाग को बंद कर डाले
तेरा ये कसूर तू दिल की नहीं दिमाग की माने
तभी तो वो सब चाल चल गए हमसे शातिराने
कोई बात नहीं वो देगा सब जवाब जो इस जहाँ में
सबकी जाने सबकी जाने
तब राम जी ना सुनेंगे तेरे बहाने तेरे बहाने
मुझको तो याद रह जायेंगे वो लम्हे
जो तेरे संग सदियों से बिता डाले
तेरी वो हंसी - वो अदा जो इस
मृत शरीर में भी जान डाले
थमने लगेगा वक़्त मेरा अब दिन में
भी ना होंगे कभी उजाले - उजाले
रोयेगा - पछतायेगा बड़ा और बोलेगा
मेरा क्या कसूर रब्बा
जब खुद ही वो सब जुर्म क़बूल कर डाले
जा रहा हूँ उस दुनिया में
जहां तेरी कोई बात ना होगी
लगता है अब क्या आगे भी तेरी
क्या औकात होगी औकात होगी
ये जमाना मानता होगा कि मैं शायर हूँ बड़ा
पर मेरा तुझसे आत्मिक रिश्ता था - है और रहेगा बड़ा
अब तो मैं तेरे लिए खुद से भी हूँ लड़ा
कह रहा हूँ खुद से अगर इसके आगे
उसके लिए एक भी शब्द लिखा कड़ा
कतरा - कतरा रुला दूंगा तेरा
फिर तू क्या लिख पायेगा
मेरा क्या कसूर में बड़ा
ना बाबा मेरी इतनी हिम्मत कहाँ जो
खुद से पंगा ले डाले लो कर चला
दिल से दुआ मेरे मौला तू मेरे सॅटॅलाइट के
जीवन को हर खुशियों से भर डाले
अब कभी ना गम उसके जीवन में
अपनी परछाई भी ना डाले
ना डाले।

