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संदीप सिंधवाल

Abstract


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संदीप सिंधवाल

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मेरा देश बदल रहा है

मेरा देश बदल रहा है

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खबरों में छपा है 

आंकड़ों में रखा है

भाषणों में कहा है 

मेरा देश बदल रहा है


रोज के कांड कहते

देश तो बदल रहा है।


जो होना था उसके लिए

या जो होना नहीं चाहिए

देश तो बदल रहा है। 


बदलते बदलते कहां पहुंचे

छुपा नहीं है किसी से 

तरक्की की कीमत चुकाने को

देश बदल रहा है। 


जिसके लिए जाने जाते थे 

वो वजूद बदल रहा है 

हां मेरा देश बदल रहा है। 


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