जिंदगी विलोम शब्द-सी
जिंदगी विलोम शब्द-सी
जिंदगी भी,
विलोम शब्द -सी होती है।
एक हार जाता है।
जिंदगी की बाजी को,
बार- बार
दूसरा जीतता ही,
चला जाता है।
एक ढूंढता है।
अपनों को दुनिया की भीड़ में,
दूसरा अपनों में भी,
पराया रह जाता है।
एक ढूंढता है।
सत्य को,
लेकिन सबूत नही जुटा पाता है।
एक झूठ को ओड़े -ओड़े,
सच हो जाता है।
एक ढूंढता है।
प्यार के ढाई आखर।
लेकिन कोई मिल नहीं पाता है।
दूसरा नफरतों की,
आंधियाँ आंखों में ,
भर -भर लाता है।
एक ढूंढता है।
खुशियों को,
हंसने के बहाने ढूंढता है।
दूसरा गमों में,
आ -आ के डूबों जाता है।
एक खो जाता है।
भीड़ का हिस्सा बन कर।
और दूसरा
तन्हाई का हिस्सा ले आता है।
एक ढूंढता है।
शान्ति को,
सुकून को,
दूसरा बेचैनियां,
फैला जाता है।
एक ढूंढता है।
सब बराबरी से जियें।
दूसरा अन्तरालों पे अन्तरालों
की खाई खोद जाता है।
