बापु के तीन बंदर
बापु के तीन बंदर
गाँधी जी के तीन बंदर जीवन के प्रारूप,
ज्ञान, संस्कार, ध्यान का हैं सकार रूप ,
व्यक्ति में गुण हो ये, व्यक्ति हो संपूर्ण,
गांधी जी के तीन बंदर देते ज्ञान पूर्ण ,
सामाज अविरल धारा ,उच्च-निम्न संयुक्त
बहो गति से पर रहो सब पाप से उन्मुक्त,
बुरा सुनो नहीं, संचार पाप से हो मुक्त,
बुरा कहो नहीं, संचार पाप ना हो व्यक्त,
बुरा देखो नहीं अतः उठाओ कुछ कदम,
बापू का अनुकरण करो, दूर करो अहम,
जिसने बापू को पढ़ा, समझा ये मूल मंत्र,
कर्म इंसान को दिलवाता सम्मान अनंत,
गांधीजी के तीन बंदर जीवन के दृढ़ संकल्प,
सोचो, समझो, कुछ करो, ढूंढों मत विकल्प।
