मेरा छोटा सा संसार
मेरा छोटा सा संसार
जीवन का चक्र है सारा, मात-पिता संग बच्चों से बनता परिवार
हँसता बचपन खेलता लड़कपन यही है मेरा छोटा सा संसार
हर पल फैला रहता खिलौने,कलम,किताब से मेरा घरबार
ऊछल कूद न हो जिस दिन,मायूस दिखे हर कोना बार-बार
दिनभर रहती आगे पीछे,थक जाती हूँ सुनकर चीख पुकार
शाम की थकान जादू की झप्पी से दूर करते आज के शैतान
कभी लड़ते कभी झगड़ते आपस में फिर मिल जाते
सुख दुःख हैं सब साथ निभाते,मनाते साथ हर त्यौहार
सभी के घरों में यूँ ही चलता रहे ये कभी न रुके ये चक्रधार
फलती फूलती रहें ख़ुशियाँ यूँ ही,इन्हीं में बसा जग संसार।
