STORYMIRROR

Rooh Lost_Soul

Romance

3  

Rooh Lost_Soul

Romance

मेंहदी

मेंहदी

1 min
168

मेहंदी से सजती थी

कभी मेरी हथेलियां 

या चांद छुपता था आकर 

मेरे हाथों में..


तुम्हारी कविताओं में 

होती थी मैं, या

तुम्हारे जीवन की 

इकलौती कविता थी मैं।


फैसला तुम्हारा था या 

कोई मजबूरी थी,

परछाई देखती कैसे, 

अमावस के इस पहर में मैं,


अब तो मैं हूँ भी या हूँ भी नहीं...

ये भी मैं भूल गई।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance