मौत
मौत
लहलहाती खड़ी फसल
उम्मीद की प्यारी किरण
मेरे परिवार की रोटी
ख्वाहिशें छोटी छोटी
गाँव में सम्मान पाऊँ
बिटिया का ब्याह रचाऊँ
बारात का स्वागत करूँ
हँसी ख़ुशी विदा करूँ
किस्मत ने फिर दाँव खेला
धू धू कर खाक हुआ
कतरा कतरा साफ हुआ
आंसुओं की आग बाढ़ भी
न बुझा सकी इस आग को
अरमानों में आग लगी
खड़ी फसल बर्बाद हुई
चूल्हा अब कैसे जलेगा
मण्डप ब्याह का कैसे सजेगा
कर्ज़ अब कैसे पटेगा
हाथ अपने जला आया
मगर फसल को न बचा पाया।
