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पता नहीं

पता नहीं

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मुझे पता नहीं मेरे बेटे

खून पसीना खूब बहाया

तेरा मान कैसे बढाऊँ


आगे पीछे संसार बड़ा

महंगे स्कूलों से भरा

कहाँ से लाऊँ इतना धन

बोरा भर अनाज भी नहीं

कैसे तुझे काबिल बनाऊँ


शिक्षा अब व्यापर बनी

गुरु बन गए है व्यापारी

माँ सरस्वती का पूजन भी अब

लक्ष्मी बिन अधूरा हुआ


गुरुकुल में थी शिक्षा दीक्षा

क्या राजा क्या रंक

अब नया ज़माना आया

सूट बूट का आवरण पहनाया


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