मैं
मैं
मैं नहीं नहीं ! मैं कहीं नहीं !
सच्चे दिल से जहाँ ,ढूंढोगी मुझे पाओगी खड़ा वहीं ।
मैं तुम्हारे सपने में भी ,तुम्हारा हकीकत भी
मैं तुम्हारे ख्यालों में भी ,ख्वाबों में भी ।
मैं तुम्हारे दिल के अंदर ही तो बसता हूं।
बाहर मैं तुमसे हूं ही नहीं ।
मैं सुबह की सूरज की किरण बनकर रोज दस्तक देता हूं ,
तुम्हें जगाने के लिए
रोज की धूप के टुकड़े ये तुम्हें संदेश देती है कि -
वो दिन दूर नहीं जब हमारी ये दूरियां
इतनी ही निष्ठा से करीबियां बनकर आएंगीं ।
शाम को वो आकाश में चमकता सितारा मैं ही तो हूं ,
जो तुम्हें एहसास कराता रहता हूं कि मैं कभी दूर तुमसे गया ही नहीं कभी
मैं वही सितारा हूं जो कभी तेरे माथे की बिंदी बनकर तेरे मुस्कान की शोभा बढ़ाऊँगा ।
तो बताओं मैं कभी तुमसे दूर हुआ था ।
न कभी दूर होऊँगा ।
क्योंकि मैं तुम्हारा सपना नहीं हकीकत हूं ।
अपना हूं और अपने कभी अपनों से दूर रहकर भी दूर नहीं जा पाते ।

