मैं प्रेम में हूँ
मैं प्रेम में हूँ
क्य़ूँकि...
मैं तुम्हारे
प्रेम में हूँऔर..
प्रेम में
सावन क्या..
पतझण क्या.
और..
क्या है बसंत...?
आना क्या
और
जाना क्या..?
क्या है टूटना
और क्या है बिखरना...?
प्रेम में बस चिंगारी है
और..
राख है दबी हुई
प्रेम में बस प्रेम है..!

