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V. Aaradhyaa

Classics Fantasy Inspirational

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V. Aaradhyaa

Classics Fantasy Inspirational

मैं बेचारी नहीं एक नारी हूँ

मैं बेचारी नहीं एक नारी हूँ

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बेचारी नहीं मैं नारी हूँ।

घर परिवार की फुलवारी हूँ।

कोमल मुझे समझना नहीं।

मैं आज सब पर भारी हूँ।।


घर परिवार मै चलाती हूँ।

प्रेम से भोजन खिलाती हूँ।

पति के संग खेतो पर जा।

बराबर हल चलाती हूँ।।

हां मैं नारी हूँ।।


जंगल से चारा लाती हूँ।

जानवरों को खिला दूध बेच।

पैसा कमाती हूँ।

पति का हाथ बटाती हूँ।।

हां मै नारी हूँ।


आधुनिक हूँ पढ लिखकर।

हर क्षेत्र में मैने कदम रखा है।

कमजोर नहीं हूँ।

होशलो से आगे बढ़ी हूँ।

हां मै नारी हूँ।।


एक बच्चे को जन्म देती हूँ।

पालन पोषण करती हूँ।

उसको कोई कष्ट न हो।

हर दुख चुप सहती हूँ।

उफ तक नहीं करती।

मै अबला नहीं सबला हूँ।

हां मै नारी हूँ।।


अगर कोई मेरे चरित्र पर।

या मेरे अस्तित्व पर उंगली उठाता है।

तो मै दुर्गा हूँ काली हूँ रणचंडी हूँ।

बदला लिए नहीं छोड़ती।

मैं ऐसी दैवीय शक्ति हूँ।।


हां मैं नारी हूँ।

घर परिवार की फुलवारी हूँ।।


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