STORYMIRROR

Harish Bhatt

Tragedy

3  

Harish Bhatt

Tragedy

मैं और तुम

मैं और तुम

1 min
383

क्या कहोगे तुम

कहना था जब

खामोश थे तब

बात ही क्या अब

क्या कहूं मैं और

क्या सुनोगे तुम

जिंदगी का सफर

मीलों की दूरी और 

सदियों सी तन्हाई

अपनों की महफिल

पराया सा व्यवहार

हम नहीं रहे हम

अब तो बस

तुम-तुम और मैं-मैं


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy