STORYMIRROR

Sonam Kewat

Inspirational

4  

Sonam Kewat

Inspirational

मैं आजाद पंछी

मैं आजाद पंछी

1 min
385

छटपटाहट में कभी यहां से तोड़ती 

तो कभी वहां से मरोड़ती लेकिन

वो पिंजरा था जो टूट ही नहीं रहा था 

आखिर मैं उड़ती भी तो कैसे उड़ती 


खुश हुआ करते थे लोग अक्सर

मुझे यूं ही पिंजरे में कैद देखकर 

बस वही से टूटने लगता था 

आजाद होने का मेरा सबर


बड़ी मशक्कत के बाद आखिर

एक दिन पिंजरा तोड़ ही डाला 

फिर वहां से खुद को बाहर 

खुली हवा में मैंने निकाला 


उड़ते उड़ते कुछ शिकारी मिले थे 

मेरे पंखों को तोड़ने के लिए पर 

मेरे हौसलों ने मजबूर कर दिया 

उन्हें तुरंत ही छोड़ने के लिए 


बड़े बरसों बाद आज इतना उड़ी कि 

थकने के बाद भी उड़ना नहीं छोड़ा 

मन था एक बार वापस चलीं जाउँ पर

मैंने अपना रास्ता नहीं मोड़ा 


जिसे कोई अब कैद नहीं कर सकता 

मैं वैसी ही एक ख्वाब हूं

बस यूं समझ लो कि तब से आज तक

मैं एक पंछी आजाद हूं. 



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational