STORYMIRROR

Rachanaa Nodiyaal

Tragedy

3  

Rachanaa Nodiyaal

Tragedy

मायका

मायका

1 min
316

विवाह ‌‌‌‌‌‌‌‌‌के‌ बाद कुछ पराया सा लगता है 

एक‌ स्त्री को उसका मायका,


जहां बचपन से यौवन बिताया था ‌‌‌‌‌कभी

वहीं कुछ कुछ मेहमान की तरह आवभगत होता है उसका,


जहां तरह तरह के पकवान बनाए थे उसने

वही रसोईघर लगता है अजनबी सा,


जिस घर में वह कभी शोर कर कर के

आसमान सिर पर उठाती थी कभी,


जहां हर रोज़ ‌‌‌‌सब को पसंद आता था

उसके हाथों से बने भोजन ‌‌‌‌‌‌‌‌का ज़ायका,


वही घर अब कहलाता है

उसका मायका।

  


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy