STORYMIRROR

Shailaja Bhattad

Abstract

2  

Shailaja Bhattad

Abstract

मापदंड

मापदंड

1 min
19

इस तंग सी जिंदगी में देखो

कितनी जंग है। 

इस दायरे में नहीं कोई संग है।

ना कोई खास है।

ना कोई आस-पास है। 

है तो बस डगमगाते कदम। 

दोहरी जिंदगी के दोहरे मापदंड।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract