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Shailaja Bhattad

Abstract

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Shailaja Bhattad

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माता की हुंकार

माता की हुंकार

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वर्ष में चार बार, आता मां का त्यौहार।

माता के हर जाप में, होता शब्द ओंकार।

करके मां का ध्यान, भरता आत्मविश्वास।

माता के होते नौ दिन, हर दिन नव्यालंकार।

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प्रेममय जीवन बन जाता। 

खुशियों का सागर लहराता। 

पल-पल जब सुमिरन होता। 

रोम रोम मंदिर बन जाता।

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शीलवान बनाती माता।

अंतस परिष्कृत हो जाता।

प्रेममय जीवन बन जाता।

 खुशियों का सागर लहराता।

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दुष्ट दहल जाते सुन माता की हुंकार।

रौद्र रूप में आ जाती मां,

 सुन भक्तों की करुण पुकार।

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है अंतर्यामी माता

पल में हरती ताप।

भक्तों की भक्ति का, 

रखती माता मान

भक्त भी अनुशासित होते, 

 है भक्ति का प्रताप।

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शीलवान बनाती माता।

अंतस परिष्कृत हो जाता।

घर-घर तीर्थ बन जाता।

खुशियों का सागर लहराता।

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माता को प्रणाम है ।

बारंबार प्रणाम।

माता से अरदास है।

मंगल कीजे काम।

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