माता की हुंकार
माता की हुंकार
वर्ष में चार बार, आता मां का त्यौहार।
माता के हर जाप में, होता शब्द ओंकार।
करके मां का ध्यान, भरता आत्मविश्वास।
माता के होते नौ दिन, हर दिन नव्यालंकार।
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प्रेममय जीवन बन जाता।
खुशियों का सागर लहराता।
पल-पल जब सुमिरन होता।
रोम रोम मंदिर बन जाता।
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शीलवान बनाती माता।
अंतस परिष्कृत हो जाता।
प्रेममय जीवन बन जाता।
खुशियों का सागर लहराता।
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दुष्ट दहल जाते सुन माता की हुंकार।
रौद्र रूप में आ जाती मां,
सुन भक्तों की करुण पुकार।
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है अंतर्यामी माता
पल में हरती ताप।
भक्तों की भक्ति का,
रखती माता मान
भक्त भी अनुशासित होते,
है भक्ति का प्रताप।
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शीलवान बनाती माता।
अंतस परिष्कृत हो जाता।
घर-घर तीर्थ बन जाता।
खुशियों का सागर लहराता।
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माता को प्रणाम है ।
बारंबार प्रणाम।
माता से अरदास है।
मंगल कीजे काम।
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