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मिली साहा

Abstract

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मिली साहा

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माँ

माँ

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तेरा ममता से भरा हुआ हृदय तो मेरी पाठशाला है माँ,

जीवन की प्यास में दरिया है तू अँधेरे में उजाला है माँ,


हर तकलीफ से बचाती है तू मेरा हर दर्द हर लेती है तू,

ममता का अमृत सागर भरा जिसमें तू वो प्याला है माँ,


मैं परछाई हूँ तेरी रूह से जुड़ा हुआ हमारा यह रिश्ता,

जब भी लड़खड़ाए मेरे कदम तूने ही तो संभाला है माँ,


तेरे दिए संस्कार ही मेरे जीवन की राह आसान बनाते,

तू हिम्मत बनी है मेरी जब भी ज़िंदगी ने रुलाया है माँ,


तुझसे ही तो है मेरी ये पहचान, जीवन के हर मोड़ पर,

बस तेरी एक दुआ ने मेरी हर मुश्किल को टाला है माँ,


तू ही तो मेरी पहली गुरु तुझसे ही सीखा जीवन जीना,

सखा भी बनी प्रथम तू तेरा प्यार कितना निराला है माँ,


आज भी जीवन के हर मोड़ पे तेरी ममता ताकत मेरी,

तेरे आशीर्वाद से ही तो मुश्किलों में मिले हौसला है माँ,


मिले दुनिया की कोई भी दौलत तेरे प्यार से कम है वो,

मेरे ख़्वाबों को तूने ही तो अपनी आंँखों में पाला है माँ,


जो कुछ भी तेरी बदौलत हूँ तुझसे अलग मैं कुछ नहीं,

मेरे जीवन की अनमोल दौलत तेरे नेह का प्याला है माँ।



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