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मिली साहा

Abstract

4.9  

मिली साहा

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मां की ममता

मां की ममता

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मां के बारे में क्या लिखूं वो तो खुद ही पूरी किताब है

मां का प्यार अनमोल है जिसका नहीं कोई हिसाब है


मां धरती पर ईश्वर का दिया सबसे अनमोल वरदान है

उनसे ही तो जीवन मिला है हमें वही हमारी पहचान है


मां की नजरों से ही पहली बार हमने दुनिया को देखा

उनकी उंगली पकड़कर ही तो चलना है हमने सीखा


खुद भूखी रहकर भी मां पहला निवाला हमें खिलाती

अपनी थकान भूलाकर सदा चैन की नींद हमें सुलाती


भाव देखकर चेहरे के दिल की हर बात समझ जाती 

हमारी खुशियों की खातिर अपने सारे गम भुला देती


हमारे अटपटे सवालों से मां कभी परेशान नहीं होती 

पूछों चाहे कितने भी सवाल सदा हंसकर जवाब देती


रिश्तो को खूबसूरती से निभाना मां ने हमें सिखाया

जीवन की पहली शिक्षा भी तो मां से ही हमने पाया


शीतल छाया देकर दुनिया की तपिश से हमें बचाया

सही गलत की पहचान करना मां ने ही हमें सिखाया


दुनिया के हर दुख दर्द और गम से मां ने हमें बचाया

जीवन जीने का सही तरीका मां ने ही हमें समझाया 


अपने जीवन का हर लम्हा मां ने हमारे लिए है जिया

अपने अनमोल प्यार के बदले कभी कुछ नहीं लिया


हो जाएं हम कितने भी बड़े मां से बड़े नहीं हो सकते

मां का कर्ज हम किसी जन्म में भी चुका नहीं सकते


मां अपनी हो या किसी और की मां बस मां होती है

मां के लिए उसकी हर औलाद उसकी जान होती है!

                     

     


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