Pooja Kalsariya
Abstract
मस्तिष्क की विराट
शून्यता को चीरकर
विचार
जन्म पाते हैं।
शब्दों की देहरी
चढ़ते-चढ़ते
संवादों से
मुठभेड़ कर
दम तोड़ जाते हैं।
और फिर
दिनदहाड़े
एक कविता की
मौत हो जाती है।
संभल जाओ ऐ दु...
शिक्षकों को स...
नए दिन की सहर
परम्परा
संघर्ष
लम्हे
मेरे सुपर हीर...
चंद लम्हें
समय के साथ .....
हाथों की लकीर...
प्रसूनक त्याग ललित को प्राप्त हो किसलय रूप अपनाती हैं। प्रसूनक त्याग ललित को प्राप्त हो किसलय रूप अपनाती हैं।
भाभियों को रोक टोक देते हैं फिजूल झगड़े रोक लेते हैं। कुछ उज्जड लड़के बड़े ही ढीठ होते भाभियों को रोक टोक देते हैं फिजूल झगड़े रोक लेते हैं। कुछ उज्जड लड़के बड़...
पट्टियां बांध निकल घोड़ों की तरह खतरों को देखने की जरूरत क्या है ? पट्टियां बांध निकल घोड़ों की तरह खतरों को देखने की जरूरत क्या है ?
जुनून हदे इंतहा तक बरसता रहा कभी यहाँ कभी वहाँ। जुनून हदे इंतहा तक बरसता रहा कभी यहाँ कभी वहाँ।
तान सा मकंरद चहके गीत अभिनंदन सुनाकर। तान सा मकंरद चहके गीत अभिनंदन सुनाकर।
आज की तारिक ने कैलेंडर ही बदल दिया उस दीवार पर लगी कील से ! आज की तारिक ने कैलेंडर ही बदल दिया उस दीवार पर लगी कील से !
यूँ तो मैं चट्टानों से भी टकराने का हौंसला रखता हूँ। यूँ तो मैं चट्टानों से भी टकराने का हौंसला रखता हूँ।
तू बजट से उम्मीद को छोड़ दे, खुद को बना नव दीप प्रकाश है। तू बजट से उम्मीद को छोड़ दे, खुद को बना नव दीप प्रकाश है।
हर रात होते हैं तुझे छोड़ने के वादे, हर सुबह नशा मुझे जकड़ ही लेता है! हर रात होते हैं तुझे छोड़ने के वादे, हर सुबह नशा मुझे जकड़ ही लेता है!
कहते हैं बनारस की गलियों में, कुल्हड़ में गर्म इश्क़ मिलता है। कहते हैं बनारस की गलियों में, कुल्हड़ में गर्म इश्क़ मिलता है।
और हम अपना सारा का सारा दुख भूल जाएंगे। और हम अपना सारा का सारा दुख भूल जाएंगे।
मालिक मिरे मुझको, मज़ह'ब न पता है। मैं सिर्फ इक इंसान का बच्चा हूं।। मालिक मिरे मुझको, मज़ह'ब न पता है। मैं सिर्फ इक इंसान का बच्चा हूं।।
पर बूंद की तरह हम भी इक दिन मिट ही जाते हैं। पर बूंद की तरह हम भी इक दिन मिट ही जाते हैं।
आखिर ये कब तक आज बस दो शब्द। आखिर ये कब तक आज बस दो शब्द।
साथ सजना का मिला जब , प्रेम मन में है खिले। साथ सजना का मिला जब , प्रेम मन में है खिले।
मैं लिखती हुँ बेफ़िक्र हो जज़्बात जो मन में होते हैं। मैं लिखती हुँ बेफ़िक्र हो जज़्बात जो मन में होते हैं।
नहीं खो सकती नहीं खोना चाहती कभी इस लिए खामोश ही रहीं। नहीं खो सकती नहीं खोना चाहती कभी इस लिए खामोश ही रहीं।
ये जो दुनिया में चेहरे हैं, किस्से इनके जीवन से भी गहरे हैं। ये जो दुनिया में चेहरे हैं, किस्से इनके जीवन से भी गहरे हैं।
ध्यान रखना है हमें स्वयं का, यही तो हमारी कलाकारी है। ध्यान रखना है हमें स्वयं का, यही तो हमारी कलाकारी है।
अपने आप को खामोश रख आज एक कली फिर फूल बनेगी। अपने आप को खामोश रख आज एक कली फिर फूल बनेगी।