Pooja Kalsariya
Abstract
मस्तिष्क की विराट
शून्यता को चीरकर
विचार
जन्म पाते हैं।
शब्दों की देहरी
चढ़ते-चढ़ते
संवादों से
मुठभेड़ कर
दम तोड़ जाते हैं।
और फिर
दिनदहाड़े
एक कविता की
मौत हो जाती है।
संभल जाओ ऐ दु...
शिक्षकों को स...
नए दिन की सहर
परम्परा
संघर्ष
लम्हे
मेरे सुपर हीर...
चंद लम्हें
समय के साथ .....
हाथों की लकीर...
मैं वो शायर हूँ, प्रेम पर लिखा, सुख दुःख पर, भी लिखता हूँ। मैं वो शायर हूँ, प्रेम पर लिखा, सुख दुःख पर, भी लिखता हूँ।
शब्द अंतिम जब मान लिखना है मुश्किल बड़ी आप लीजिए जान। शब्द अंतिम जब मान लिखना है मुश्किल बड़ी आप लीजिए जान।
हस्ती जता रहे। बाकी कितने अभी और ढकोसले। हस्ती जता रहे। बाकी कितने अभी और ढकोसले।
थोड़ा सा बचपन हम छुपा कर रखते हैं हंसने खिलखिलाने की कुछ वजह साथ रखते हैं। थोड़ा सा बचपन हम छुपा कर रखते हैं हंसने खिलखिलाने की कुछ वजह साथ रखते हैं।
तुम फिर वही ठंड लेकर आना हम फिर से रजाई लेकर आएंगे। तुम फिर वही ठंड लेकर आना हम फिर से रजाई लेकर आएंगे।
माथा ख़राब है अजि मेरा माथा ख़राब है मुझसे मत उलझना मेरा मन बेताब है।। माथा ख़राब है अजि मेरा माथा ख़राब है मुझसे मत उलझना मेरा मन बेताब है।।
रख सको तो रख लो पास में एक अनमोल निशानी हूं मैं रख सको तो रख लो पास में एक अनमोल निशानी हूं मैं
दुर्घटनाएं जीवन को सख्त बनाती, मनुष्य की सहनशक्ति बढ़ाती दुर्घटनाएं जीवन को सख्त बनाती, मनुष्य की सहनशक्ति बढ़ाती
तुम्हें हर चेहरे पर नये मुखौटे मिलेंगे, उन मुखौटों पर कितने भाव खिलेंगे, तुम्हें हर चेहरे पर नये मुखौटे मिलेंगे, उन मुखौटों पर कितने भाव खिलेंगे,
जो प्रेम परीक्षा लेता है जो प्रेम परीक्षा लेता है
उदास मन हो तो जहाँ वीरान लगता है, हर कोई जाना-पहचाना भी अनजान लगता है। उदास मन हो तो जहाँ वीरान लगता है, हर कोई जाना-पहचाना भी अनजान लगता है।
विश्व विजेता की लालसा धूमिल सिकंदर को हराए पोरस । विश्व विजेता की लालसा धूमिल सिकंदर को हराए पोरस ।
बूढ़ा भी तरोताजा हो जाता है बूढ़ा भी तरोताजा हो जाता है
जहाँ लेखक ही लेखक से वोट माँगे, और पाठक का कोई मूल्य ना जाने, बस चाहते सब गले में तमगा जहाँ लेखक ही लेखक से वोट माँगे, और पाठक का कोई मूल्य ना जाने, बस चाहते सब गले मे...
पथ अपना बनाऊंगी। जीत के झंडे,, चांद पर लहरऊंगी। पथ अपना बनाऊंगी। जीत के झंडे,, चांद पर लहरऊंगी।
थम गई साँसों की डोर धड़कन में मची थी शोर थम गई साँसों की डोर धड़कन में मची थी शोर
किसके हिस्से में लिखोगी ये सवाल फिर आया मन में दर्पण को देखा किसके हिस्से में लिखोगी ये सवाल फिर आया मन में दर्पण को देखा
अपनी हंसी से सबको खुश कर जाये, मीठी मीठी बातों से मन खुश कर जाये, अपनी हंसी से सबको खुश कर जाये, मीठी मीठी बातों से मन खुश कर जाये,
बिना सपनों के कौन सी मंजिल मिलेगी? बिना सपनों के कौन सी मंजिल मिलेगी?
कोयल जैसी मधुर है वाणी, है चंचल नयनों की रानी। कोयल जैसी मधुर है वाणी, है चंचल नयनों की रानी।